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Mr. Jagdeesh TIwari Journalist
Orchha India

संसार के
उथलेपन मेँ ही
डूबकर
हम
रह गये
मन की गहराई
मेँ
उतरते
पार तो
पा जाते



Mr. Sumit Mishra Poet
Orchha, India

फकत वोटो की खातिर ईद या इफ्तारी नहीं होगी
मेरी गाय खाने वालों से कभी यारी नहीं होगी ।।
दुआ गर अमन की है तो फिर ये आरियाँ कैसी ?
ऐ दोगला भेष तो खुदा से भी वफादारी नहीं होगी।।
गला जो गाय माँ का काटते हों उनसे गले मिलना
मेरी ये मेरे मजहब से ही क्या मक्कारी नहीं होगी।
गर अब और होगा जुल्म तो हम एलान कर देंगे
किसी मोमिन से अब कोई भी खरीदारी नहीं होगी।
जो हमसे प्यार करता है ,हम उस पर जान देते हैं
पर जख्म खा के हमसे अब दिलदारी नहीं होगी ।।
कुछ हमारे "सेकुलर भाई" तुम्हे वाजिब बताएँगे
पर है संकर नस्ल वो तेरी या हमारी नहीं होगी।।

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